Monday, May 31, 2010

।।हम नै तॅ कोइ और सही।।

प्रभात झा

की हौ नेता चलल हेतौ तोरा ओहि बियाबान मे?
देखाइत छौ तोरा मनुख अन्हार मे?
तेज़ रौशनी के आदत हेतौ ने?
सुझैत छौ ओ मनुख जे पतंगा जकां निर्भर अछि
गाछ, पात, पशु, पक्षी पर?
जीवन मे कखनौं गेलह हे ओहि दीस?
सोचलहक हे केना हेतै ओकर जीवन निरबाह
बिना अइ सबहक?

कोंन अधिकारे हम पुछैत छी ई प्रश्न?
केना छी हम ओहि लोकक आवाज़?
की ओकरा सब द' नै बाजिब छइ बाजब?
किया टिपइ छी बीच मे अनेरो?
अधिकार की अछि हमर?
लेकिन की करी?
कोना चुप रही?
किछु त' बाजब?
कोइ त' बाजत?
ओ नै त' हम सही,
हम नै त कोइ और सही.

Friday, May 28, 2010

।।साल-दर-साल गांधी-वध।।

तारानन्द वियोगीक मैथिली कविता

।।गिद्धक पक्ष मे एकटा कविता।।

गामक नाम--गिदवास
गामक नाम--गिदपुरा
कोनो गामक नाम गीधा
कोनो गामक नाम गिद्धौर

कहबाक माने की?

माने जे गिद्ध मुर्दाबाद
गिद्ध मुर्दाबाद मुर्दाबाद....

दोहाइ हे नियन्ता लोकनि
अरारि तॅ रहल छल हएत गौंआं सब सॅ
मुदा शिकार बनल गिद्ध।

आ देखियौ
जे एतेक शताब्दी बाद
से गिद्ध मारल गेल
रहलै नै क्यो कुल मे रोबनहारा
करेज जुडाएल दुश्मन के।

आ देखियौ
जे दुनियां आब कानैए गिद्ध लेल


बकैए जे उकन्नन भ' गेल एक दुर्लभ प्रजाति।


।।साल-दर-साल गांधी-वध।।


एहि साल फेर गांधी मुइलाह
तॅ मने हमहूं भेलहुं निश्चिन्त।

एह,
तीस साल सॅ
केने रहथि हरान
बेर बेर पछताबी जे
ओह, हम गांधी नहि बनि सकलहुं
गांधीक देश मे जनमियो क'
हम गांधी नहि बनि सकलहुं।

अइ बेर मुइलाह गांधी
तॅ मने भेल छी निश्चिन्त।

जागल अछि भरोस
जे लोक आब सोचताह।
नेतावादक बाद?
---माओवाद?

होइए जे लोक आब
आगू सोचताह जरूर।

सोचैए पडतनि.....