Monday, July 12, 2010

'ऑनर-किलिंग' पर एक मैथिल प्रतिक्रिया


'ऑनर-किलिंग' पर एक मैथिल प्रतिक्रिया

।।मुकुट।।


दुनियां बहुत बेदिल छै
हौ बाबू जोगीलाल,
कते तोरा हम कहबह
तों की कम बुझक्कड लाल?

बड मुश्किल सॅ कतहु-कतहु
दिल मे दिल मिलै छै
आब, छोडह ई बात जे--
तै सॅ इन्द्रासन हिलै छै।

मिलल जॅ छह दिल मे दिल
तॅ केवल अपन 'पगडी' दुआरे
एकरा तोडह नहि
ककर के होइ छै सुत-वित-नारि
हौ, अइ मुकुट कें छोडह नहि।

1 comment:

संजय बेंगाणी said...

मैथलि आती, समझने की कोशिश की. मानार्थ-हत्या पर कविता देख अच्छा लगा.