तारानन्द वियोगीक मैथिली कविता
।।गिद्धक पक्ष मे एकटा कविता।।
गामक नाम--गिदवास
गामक नाम--गिदपुरा
कोनो गामक नाम गीधा
कोनो गामक नाम गिद्धौर
कहबाक माने की?
माने जे गिद्ध मुर्दाबाद
गिद्ध मुर्दाबाद मुर्दाबाद....
दोहाइ हे नियन्ता लोकनि
अरारि तॅ रहल छल हएत गौंआं सब सॅ
मुदा शिकार बनल गिद्ध।
आ देखियौ
जे एतेक शताब्दी बाद
से गिद्ध मारल गेल
रहलै नै क्यो कुल मे रोबनहारा
करेज जुडाएल दुश्मन के।
आ देखियौ
जे दुनियां आब कानैए गिद्ध लेल
बकैए जे उकन्नन भ' गेल एक दुर्लभ प्रजाति।
।।साल-दर-साल गांधी-वध।।
एहि साल फेर गांधी मुइलाह
तॅ मने हमहूं भेलहुं निश्चिन्त।
एह,
तीस साल सॅ
केने रहथि हरान
बेर बेर पछताबी जे
ओह, हम गांधी नहि बनि सकलहुं
गांधीक देश मे जनमियो क'
हम गांधी नहि बनि सकलहुं।
अइ बेर मुइलाह गांधी
तॅ मने भेल छी निश्चिन्त।
जागल अछि भरोस
जे लोक आब सोचताह।
नेतावादक बाद?
---माओवाद?
होइए जे लोक आब
आगू सोचताह जरूर।
सोचैए पडतनि.....
Friday, May 28, 2010
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mice
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